खानपुर। खानपुर विधायक सुरेश गुर्जर ने राजस्थान विधानसभा में नियम 50 के तहत स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत कर प्रदेश में विशेष शिक्षकों के रिक्त पदों पर रुकी हुई भर्तियों और दिव्यांग विद्यार्थियों की बाधित शिक्षा से उत्पन्न स्थिति की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि विशेष शिक्षकों के पद रिक्त चल रहे हैं ऐसे में इनकी पढ़ाई की कोई व्यवस्था सरकार नहीं कर रही है। गुर्जर ने कहा कि प्रदेश का दिव्यांग वर्ग और प्रशिक्षित बेरोजगार युवा स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में समावेशी शिक्षा को अनिवार्य बताया गया है, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक प्रत्येक विद्यालय में विशेष शिक्षक का पद सृजित नहीं किया है।
2023 से नहीं हो रही विशेष शिक्षकों की भर्ती
विधायक ने सदन को आंकड़ों के साथ अवगत कराया कि साल 2023 से विशेष शिक्षकों की कोई नई भर्ती आयोजित नहीं हुई है। इसके कारण हजारों प्रशिक्षित युवा बेरोजगार दर-दर भटक रहे हैं और विद्यालयों में शिक्षकों की कमी से दिव्यांग विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो रही है।
‘2 दिव्यांग विश्वविद्यालयों को ठप कर दिया’
विधायक ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने दिव्यांगों के कल्याण के लिए स्थापित किए 2 दिव्यांग विश्वविद्यालयों को वर्तमान सरकार ने पूरी तरह ठप कर दिया है। साथ ही, हालिया बजट में भी इस वंचित वर्ग के लिए कोई प्रभावी वित्तीय प्रावधान नहीं किया गया है, जो सरकार की प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता का प्रमाण है।
विशेष शिक्षकों के रिक्त पदों पर जल्द भर्ती की मांग
सुरेश गुर्जर ने मांग की कि प्रदेश में विशेष शिक्षकों के रिक्त पदों पर अविलंब नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के अनुरूप प्रत्येक विद्यालय में विशेष शिक्षक का पद सृजित कर नियुक्ति दी जाए। बंद पड़े दिव्यांग विश्वविद्यालयों को पुनः सुचारू कर पर्याप्त बजट आवंटित करने और दिव्यांग विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति व विशेष सुविधाओं के लिए अलग से वित्तीय पैकेज की घोषणा करने की भी मांग की।






