जब एक सीन ने बदल दी थी फिल्म की पूरी कहानी
जयपुर। हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन की फिल्मों से जुड़े कई किस्से आज भी फिल्म प्रेमियों के बीच चर्चा में रहते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा 1975 में रिलीज हुई फिल्म दीवार से जुड़ा है, जिसने भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया मुकाम बनाया। आज भी इस डाॅयलॉग को याद किया जाता है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर के बीच फिल्माया गया मशहूर डायलॉग “मेरे पास मां है” आज भी बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय संवादों में गिना जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस सीन के पीछे एक बेहद भावुक कहानी छिपी हुई है।
जब सीन बन गया था असली भावनाओं का पल
फिल्म की शूटिंग के दौरान निर्देशक यश चौपड़ा चाहते थे कि दोनों भाइयों के बीच का टकराव बेहद वास्तविक लगे। कहा जाता है कि जब यह सीन शूट किया जा रहा था, तब अमिताभ बच्चन इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों में सचमुच आंसू आ गए। यह केवल अभिनय नहीं था बल्कि उस पल की भावनाएं सच में कैमरे में कैद हो गई थीं।
कैसे बना बॉलीवुड का सबसे यादगार डायलॉग
इस फिल्म की कहानी प्रसिद्ध लेखक जोड़ी सलीम खान और जावेद अख्तर ने लिखी थी। उन्होंने एक ऐसे किरदार की कहानी लिखी जो गरीबी और परिस्थितियों से लड़ते हुए अपराध की दुनिया में चला जाता है। वहीं उसका भाई ईमानदारी का रास्ता चुनता है।दोनों भाइयों के बीच का यह संघर्ष फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण बना।
फिल्म ने रच दिया था इतिहास
1975 में रिलीज हुई दीवार उस दौर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक साबित हुई। फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की बल्कि अमिताभ बच्चन को “एंग्री यंग मैन” की छवि भी दिलाई। इसके बाद उनकी कई फिल्मों में इसी तरह का मजबूत और विद्रोही किरदार देखने को मिला
आज भी चर्चा में रहता है यह डायलॉग
आज भी जब बॉलीवुड के सबसे यादगार डायलॉग की बात होती है तो “मेरे पास मां है” का नाम जरूर लिया जाता है।
यह संवाद सिर्फ फिल्म का हिस्सा नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा की संस्कृति का हिस्सा बन चुका है।
इसी वजह से फिल्म और उससे जुड़े किस्से आज भी दर्शकों के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं जितने रिलीज के समय थे।






