
झालावाड़
झालावाड़ की ऐतिहासिक पहचान बन चुका रोमन एक्वाडक्ट अब नए रूप में नजर आ रहा है। जिला प्रशासन ने इस 150 साल पुरानी जल संरचना को टूरिस्ट स्पॉट व सेल्फी प्वाइंट के रूप में विकसित कर दिया है। इसके तहत एक्वाडक्ट के आसपास से अतिक्रमण हटाया जा रहा है और पूरे ढांचे का रंग-रोगन कर इसे आकर्षक बनाया जा रहा है, ताकि पर्यटकों को एक नया दर्शनीय स्थल मिल सके। शहर के बीचों-बीच खड़ा यह अनोखा ढांचा लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहा, लेकिन अब इसे विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास से जोड़ा जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इसके विकसित होने से न सिर्फ स्थानीय लोगों को बेहतर सार्वजनिक स्थल मिलेगा, बल्कि झालावाड़ पर्यटन मानचित्र पर भी और मजबूत होगा। करीब एक किलोमीटर लंबा यह ढांचा अपनी मेहराबदार बनावट के कारण दूर से ही आकर्षित करता है। रंग-रोगन और सौंदर्यीकरण के बाद यह स्थल फोटो और घूमने के लिए खास आकर्षण बनेगा।
जाने क्या है रोमन एक्वाडक्ट
वर्ष: 1875, तत्कालीन शासक महाराजा पृथ्वी सिंह के काल में इसका निर्माण कराया गया।
उद्देश्य: गांवड़ी तालाब से शहर के जयराज पार्क सहित अन्य क्षेत्रों तक पेयजल और सिंचाई के लिए पानी पहुंचाना।
संरचना: लगभग 1 किलोमीटर लंबा यह एक्वाडक्ट करीब 70 मजबूत मेहराबों पर टिका हुआ है, जो इसे विशेष बनाते हैं।
इंजीनियरिंग खासियत: इसकी डिजाइन प्राचीन रोमन जल संरचनाओं से प्रेरित है, जिसमें ऊंचाई के सहारे पानी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता था।
ऐतिहासिक महत्व: यह राजस्थान का दूसरा रोमन एक्वाडक्ट है; इससे पहले 1845 में अलवर में ऐसा ढांचा बनाया गया था।
वर्तमान स्थिति: लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा आज भी सुरक्षित है, जिसे अब संरक्षित कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा






