3 एआई टूल लागू, टीबी की खांसी की आवाज से स्क्रीनिंग, हाई रिस्क क्षेत्रों की मैपिंग और गंभीर मरीजों की पहचान


झालावाड़( जिले में टीबी (क्षय रोग) की रोकथाम और इससे ग्रसित मरीजों की पहचान एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के तीन टूल से आसान हो गई है। हर टूल अलग-अलग काम करके टीबी को नियंत्रित करने में मदद करेंगे। विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर झालावाड़ जिले ने टीबी उन्मूलन की दिशा में तकनीक का सशक्त उपयोग करते हुए एआई आधारित नवाचारों की शुरुआत की। जिला स्वास्थ्य प्रशासन ने वाधवानी एआई संस्था और जेनपैक्ट सीएसआर के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में तीन अत्याधुनिक एआई सॉल्यूशन्स का प्रदर्शन किया, जो टीबी नियंत्रण की रणनीति को नई गति देंगे। यह पहल राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत की गई है, जिसका उद्देश्य टीबी की समय पर पहचान, बेहतर उपचार और संक्रमण की रोकथाम सुनिश्चित करना है। इसको लेकर पिछले दिनों एक कार्यशाला में हुई, इसमें जिले के 200 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों सहित एनटीईपी से जुड़े सभी कार्मिकों को इन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। ताकि जिले को टीबी मुक्त बनाया जा सके। इन तकनीकों के जरिए अब खांसी की आवाज का विश्लेषण कर संभावित मरीजों की पहचान, उच्च जोखिम वाले गांवों की मैपिंग और गंभीर मरीजों का पूर्व आकलन संभव हो सकेगा।
बिना लक्षण वाले मरीजों की पहचान भी संभव होगी-
सीएमएचओ डॉ. साजिद खान ने बताया कि एआई तकनीकों के उपयोग से बिना लक्षण वाले मरीजों की पहचान भी संभव हो रही है, जिससे टीबी नियंत्रण को नई मजबूती मिलेगी। वहीं जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार बंसल ने बताया कि इन नवाचारों से उपचार के परिणामों में भी सुधार देखने को मिला है और जल्द ही इन्हें जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों तक विस्तारित किया जाएगा।


तीन एआई सॉल्यूशन्स और कैसे करेंगे काम-

1. कफ अगेंस्ट टीबी (सीएटीबी)- यह मोबाइल आधारित एप्लीकेशन खांसी की आवाज का विश्लेषण कर संभावित टीबी मरीजों की पहचान करता है। इससे गांव-ढाणी स्तर पर भी बिना लैब टेस्ट के प्रारंभिक स्क्रीनिंग संभव हो सकेगी।
2. वल्नरेबिलिटी मैपिंग फॉर टीबी (वीएमटीबी)- इस तकनीक के जरिए जिले के उन गांवों और क्षेत्रों की पहचान की जाती है, जहां टीबी का खतरा अधिक है। इससे वहां विशेष एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान चलाकर अधिक मरीजों तक पहुंच बनाई जा सकेगी।
3. प्रिडिक्शन ऑफ एडवर्स टीबी आउटकम्स (वीएटीओ)- यह टूल उन मरीजों की पहले से पहचान करता है, जिनमें इलाज के दौरान जटिलताएं बढ़ने का खतरा होता है। इससे समय रहते विशेष निगरानी और बेहतर इलाज संभव होता है।
एआई तकनीक से क्या होंगे बड़े फायदे-
– शुरुआती स्तर पर ही टीबी मरीजों की पहचान
– बिना लक्षण वाले मरीज भी आएंगे पकड़ में
– हाई रिस्क क्षेत्रों में लक्षित अभियान संभव
– इलाज के दौरान जटिल मामलों की पहले पहचान
– ग्रामीण क्षेत्रों में भी आसान और तेज स्क्रीनिंग
– टीबी उन्मूलन लक्ष्य (टीबी फ्री इंडिया) को मिलेगी गति
—————
टीबी उन्मूलन कार्यक्रम पूरे राज्य में चल रहा है। पहले इसकी शुरूआत कोटा संभाग के चारों जिलें से हुई थी।
कफ अगेंस्ट टीबी के पूरे राज्य में 18 हजार की स्क्रीनिंग हुई, इसमें झालावाड़ के सबसे ज्यादा झालावाड़ में 6 हजार की हुई। अब यह कार्यक्रम 42 जिलों में चल रहा है।
प्रफुल्ल शर्मा, स्टेट कार्यक्रम प्रमुख, वाधवानी एआई संस्थान

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