

झालावाड़।
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग के सुपर स्पेशयिलस डॉक्टर ने एक बेहद जटिल और जोखिमपूर्ण ऑपरेशन कर 61 वर्षीय बुजुर्ग की आंख के पीछे मौजूद बड़ी कैंसर गांठ को सफलतापूर्वक निकालकर न केवल उनकी आंख की रोशनी बचाई, बल्कि उन्हें नई जिंदगी भी दी। यह ऑपरेशन लगभग 6 घंटे तक चला। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति सामान्य है और उनकी आंख की रोशनी भी वापस लौट आई है।
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के जमोनिया निवासी 61 वर्षीय हरि सिंह पिछले एक वर्ष से बाईं आंख की रोशनी कम होने की समस्या से जूझ रहे थे। बीते तीन महीनों में स्थिति गंभीर हो गई और आंख बाहर की ओर उभरने लगी। कई जगह इलाज कराने के बावजूद सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद परिजन उन्हें झालावाड़ मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। यहां न्यूरो सर्जन डॉ. राम सेवक योगी को दिखाया। मरीज की जांचे करवाई तो सामने आया कि दिमांग में आंख के पीछे कैंसर की
ऑप्टिक नर्व पर दबाव डाल रही थी बड़ी गांठ
न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. रामसेवक योगी ने जांच के बाद बताया कि मरीज की आंख के ग्लोब के पीछे बड़ी ट्यूमर जैसी गांठ थी, जो ऑप्टिक नर्व और मस्तिष्क के बेहद संवेदनशील हिस्सों पर दबाव डाल रही थी। स्थिति गंभीर और जोखिमपूर्ण थी।
सिर के रास्ते से हुआ 6 घंटे का जटिल ऑपरेशनडॉक्टरों की टीम ने सिर के रास्ते से सर्जरी कर लगभग 48×34×36 मिमी आकार की बड़ी गांठ को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। ऑपरेशन के दौरान मरीज को दो यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह ऑपरेशन तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था।
सीमित संसाधनों में बड़ी मेडिकल उपलब्धि-
डॉ. योगी ने बताया कि ऐसे जटिल ऑपरेशन सामान्यतः जयपुर के SMS अस्पताल या AIIMS जोधपुर जैसे बड़े संस्थानों में किए जाते हैं, लेकिन झालावाड़ मेडिकल कॉलेज ने सीमित संसाधनों में यह सफलता हासिल कर एक नई मिसाल कायम की है।
दूसरे राज्य के मरीज का निशुल्क इलाज, मानवता की मिसाल
अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक शर्मा और उप अधीक्षक डॉ. सुमित हाडा के विशेष सहयोग से मरीज का पूरा इलाज निशुल्क किया गया। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनकी दृष्टि भी बहाल हो चुकी है।
टीम का रहा महत्वपूर्ण योगदान
इस सफल ऑपरेशन में डॉ. रामावतार, डॉ. राजन नंदा, डॉ. अटल राज मेहता, डॉ. ज्योति काबरा, डॉ. साहिल राजा अंसारी, डॉ. अल्तमस खान, डॉ. असद सहित नर्सिंग स्टाफ कीर्ति मित्तल, कन्हैया लोहार और मुकेश सांवरिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा।




