
झालावाड़
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने बुधवार को ग्राम पंचायत मऊ बोरदा की ग्राम विकास अधिकारी को 10,400 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी ग्राम विकास अधिकारी ने सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन में शादी करने वाले जोड़ों के विवाह प्रमाण पत्र जारी करने की एवज में परिवादिया से 13,500 रुपए रिश्वत मांगी थी।
एसीबी एएसपी प्रेरणा शेखावत ने बताया कि परिवादिया ने 10 अप्रैल 26 को शिकायत दी कि वह महू महल खींची दरबार सेवा समिति की सदस्य है। संस्था ने 16 फरवरी को धानोद खुर्द, पंचायत बोरदा मऊ (खानपुर) में 26-27 जोड़ों का सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन कराया था। आयोजन समाज और संस्था के सहयोग से हुआ। इसमें किसी प्रकार का सरकारी अनुदान नहीं लिया गया। विवाह के बाद सभी जोड़ों के विवाह प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया के लिए जब परिवादिया ग्राम विकास अधिकारी रजनी मीणा के पास गई तो उसने प्रति प्रमाण पत्र 500 रुपए की मांग की। बाद में बातचीत में उसने प्रति प्रमाण पत्र 400 रुपए देने की बात कही और 26 जोड़ों के प्रमाण पत्र के लिए कुल 10,400 रुपए रिश्वत मांगी। इस पर एसीबी ने मांग का गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हो गई। इसके बाद बुधवार को ट्रैप कार्रवाई की गई।
कोटा रेंज के डीआईजी ओमप्रकाश मीणा के सुपरविजन में एसीबी झालावाड़ चौकी की एएसपी डॉ. प्रेरणा शेखावत के नेतृत्व में टीम ने आरोपी ग्राम विकास अधिकारी को रिश्वत राशि लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
मीणा के घर पर भी सर्च कार्रवाई जारी
एसीबी ने बताया कि आरोपी वीडीओ के ट्रेप होने पर एसीबी द्वारा उनके कार्यालय और और खानपुर में स्थित किराए के मकान पर भी तलाशी की कार्रवाई की जा रही है। आरोपी वीडीओ के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।
रिश्वत नहीं मिलने पर कामों में करती थी देरी
ट्रेप कार्रवाई के बाद मऊ बोरदा के ग्रामीणों ने भी आरोप लगाया कि ग्राम विकास अधिकारी रजनी मीणा के पास ग्रामीण कोई भी काम लेकर जाते थे तो उनको काफी समय तक टालती थी, जब उस काम की उनको रिश्वत मिलती थी जो ही वह काम पूरा होता था, नहीं ग्रामीण कार्यालय के चक्कर ही लगाते रहते थे।
क्या है भ्ष्टा्चार निवारण अधिनियम
सरकारी कर्मचारी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर किसी कार्य के बदले रिश्वत लेना भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दंडनीय अपराध है। इसमें दोष सिद्ध होने पर आरोपी को 3 से 7 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। एसीबी को ऐसे मामलों में ट्रैप कार्रवाई करने और आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार करने का अधिकार होता है।Sub Heading / Strap :
झालावाड़ एसीबी टीम की कार्रवाई- खानपुर पंचायत समिति की मऊ बोरदा पंचायत की ग्राम विकास अधिकारी सामूहिक विवाह के प्रमाण पत्रों के प्रति जोड़ा मांग रही थी 500 रुपए



