




फर्मों के बैंक खातों की खरीद फरोख्त से चल रहा था साइबर ठगी का बड़ा खेल,तीन गिरफ्तार
- भवानीमंडी पुलिस की कार्रवाई-देशभर में फैले नेटवर्क से ट्रांसफर होती थी ठगी की रकम, पुलिस ने बरामद किए बड़ी संख्या एटीएम और सिम, म्यूल बैंक खातों के जरिए छिपाते थे पहचान, तकनीकी जांच से हुआ खुलासा।
-एक साइबर ठग से ठगी की राशि 1.54 लाख रुपए भी बरामद की।
झालावाड़।
भवानीमंडी, झालावाड़, राजस्थान, भारत में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। फर्मों के बैंक खाते लाखों रुपए में खरीदकर उनके माध्यम से देशभर में साइबर ठगी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई एसपी अमित कुमार के निर्देशन में गठित विशेष टीम द्वारा की गई। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी आम लोगों से उनके बैंक खाते किराये पर लेते या खरीदते थे और इन्हीं “म्यूल अकाउंट्स” का उपयोग साइबर फ्रॉड की रकम ट्रांसफर करने के लिए करते थे। इस तरीके से वे अपनी पहचान छुपाकर बड़े पैमाने पर ठगी को अंजाम देते थे। गिरोह का नेटवर्क अलग-अलग राज्यों तक फैला हुआ है। पुलिस ने इस मामले में तीन साइबर ठग भवानीमंडी निवासी ललित राणा (22)पुत्र दिनेश राणा, अजय विश्वकर्मा (25) पुत्र बद्रीलाल सुथार और राजेश कुमार राठौर (43)पुत्र रमेशचंद राठौर को गिरफ्तार किया हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से भारी मात्रा में बैंकिंग सामग्री और नकदी बरामद की है। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
ऐसे सामने आया साइबर ठगी का मामला-
शुक्रवार को एएसआई अखेराम को म्यूल बैंक खाता अभियान के तहत एक गोपनीय सूचना प्राप्त हुई कि भवानीमंडी निवासी ललित राणा अपने बैंक खाते का उपयोग “म्यूल अकाउंट” के रूप में कर बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा है। इस पर पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण किया, जिसमें सामने आया कि ललित राणा अपने साथियों के साथ मिलकर विभिन्न लोगों के बैंक खातों के जरिए साइबर फ्रॉड कर रहा था और उससे आर्थिक लाभ अर्जित कर रहा था। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि ये आरोपी आमजन को लालच देकर उनके खाते इस्तेमाल करते थे और ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देते थे, जिससे उनकी पहचान छिपी रहती थी।
बैंक खातों की खरीद फरोख्त से चल रहा था ठगी का खेल-
जांच में सामने आया कि आरोपी पहले लोगों से उनके बैंक खाते खरीदते या किराये पर लेते थे। इसके बाद इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त रकम को ट्रांसफर और निकालने में किया जाता था। इस तरह ये गिरोह विभिन्न राज्यों में फैले नेटवर्क के जरिए बड़े स्तर पर ऑनलाइन धोखाधड़ी को अंजाम देता था।
तीन आरोपियों से एटीएम, चेक बुक, नकदी जब्त-
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में साइबर अपराध में प्रयुक्त सामग्री बरामद की है, इसमें 53 एटीएम कार्ड,
35 चेक बुक, 6 बैंक पासबुक, 9 मोबाइल सिम कार्ड, ₹1,54,800 नकद, विशेष रूप से आरोपी राजेश राठौर और अजय विश्वकर्मा के पास से बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज और उपकरण जब्त किए गए, जिनका उपयोग ठगी के लिए किया जा रहा था। आरोपी राजेश राठौर के पास से साइबर ठगी की 1 लाख 54 हजार 800 रुपए भी जब्त किए है।
भास्कर एक्सपर्ट… प्रमोद कुमार, थानाधिकारी, भवानीमंडी
म्यूल अकाउंट क्या होता है?
म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है इसमें खाता किसी आम व्यक्ति के नाम पर होता है, लेकिन उसका उपयोग ठग करते हैं। अपराधी लोगों को लालच देकर जैसे कमीशन या किराए के नाम पर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम हासिल कर लेते हैं। इसके बाद ठगी से प्राप्त रकम इन खातों में डाली जाती है और तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कई लोग अनजाने में या लालच में आकर अपने खाते दे देते हैं, लेकिन बाद में वही कानूनी कार्रवाई में फंस जाते हैं, क्योंकि खाता उनके नाम पर होता है।
