विश्व स्वास्थ्य दिवस पर मेडिकल कॉलेज का कार्यक्रम; टेलीमेडिसिन और रोगों से बचाव पर दिया जोर।

झालावाड़
विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक चिकित्सा विभाग की ओर से विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन शहरी स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र (यूएचटीसी) झालरापाटन में हुआ। कार्यक्रम में चिकित्सा विशेषज्ञों ने आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों, रोगों की रोकथाम और टेलीमेडिसिन की भूमिका पर चर्चा की। कार्यक्रम विभागाध्यक्ष डॉ. शकीला मुल्ला के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। इस दौरान प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉ. शौर्य रस्तोगी ने विश्व स्वास्थ्य दिवस के महत्व और स्वास्थ्य सेवाओं में नई तकनीकों के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी।
स्वास्थ्य शिक्षा से ही संभव है रोगों की रोकथाम-
डॉ. रस्तोगी ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में उपचार से बेहतर बचाव की अवधारणा को अपनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने लोगों को जीवनशैली से जुड़े रोगों से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताते हुए नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार और जागरूकता को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सही जानकारी और समय पर उपचार मिलने से कई गंभीर बीमारियों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है।
टेलीमेडिसिन से दूरियां होंगी कम-
कार्यक्रम में टेलीमेडिसिन की बढ़ती उपयोगिता पर भी जोर दिया गया। दूर-दराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से जोड़ने में टेलीमेडिसिन अहम माध्यम बन रहा है। डिजिटल तकनीक के जरिए मरीज घर बैठे चिकित्सकीय सलाह प्राप्त कर सकते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद रिक्तियों (गैप) को भरने में टेलीमेडिसिन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले समय में तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो सकती हैं।
यह है विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 की थीम- पीसीएम विभाग के हेल्थ इंस्पेक्टर गौरव सक्सेना ने बताया कि इस वर्ष डब्ल्यूएचओ ने विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम टूगेदर फोर हेल्थ स्टेंड वीथ साइंस निर्धारित की है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक और मानवीय दृष्टिकोण के संतुलन को बढ़ावा देना है, ताकि आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी भेदभाव के पहुंच सकें।
पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश-
कार्यक्रम के दौरान केंद्र परिसर में पौधारोपण भी किया गया। चिकित्सकों ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण स्वस्थ जीवन की आधारशिला है। उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण और हरित वातावरण को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में ये चिकित्सक रहे मौजूद-
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने भाग लिया, जिनमें डॉ. मधुसूदन स्वर्णकार, डॉ. मयंक जैन, डॉ. आसिफ अहमद कुरैशी, डॉ. हेम नंदनी पाठक, डॉ. उमाशंकर शुक्ला, डॉ. सुनील गोरा और डॉ. नितेश झा शामिल रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने स्वास्थ्य जागरूकता को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
