
शिक्षा विभाग की पहल : विद्यार्थियों को संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के लिए चलाया ऋषभ पखवाड़ा
झालावाड़।
प्रदेश में इस बार नया शैक्षणिक सत्र एक खास पहल के साथ शुरू होगा। राज्य सरकार के निर्देश पर विद्यालयी शिक्षा विभाग ने पहली बार नए सत्र की शुरुआत भगवान ऋषभदेव पखवाड़े से करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के मार्गदर्शन में लिया गया यह फैसला शिक्षा के साथ संस्कृति और संस्कारों को जोड़ने की दिशा में अहम माना जा रहा है। शिक्षा विभाग के अनुसार यह पहल विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास है। इससे बच्चों में सामाजिक सद्भाव, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा मिलेगा।
प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इस संबंध में सभी संयुक्त निदेशकों, जिला शिक्षा अधिकारियों और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। निर्देशों के अनुसार राज्य के सभी विद्यालयों में 1 से 15 अप्रैल तक ऋषभ पखवाड़े के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक, शैक्षणिक और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इस निर्णय का अल्पसंख्यक और युवा वर्ग ने स्वागत करते हुए इसे सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक संवाद की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।
तीन स्तरों पर होगी प्रतियोगिताएं
– पखवाड़े के दौरान विद्यार्थियों की आयु के अनुसार प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। पूर्व प्राथमिक स्तर (3-6 वर्ष) के बच्चों के लिए स्तुति, प्रार्थना, कहानी सुनना और चित्रकारी जैसी गतिविधियां होंगी।
– प्राथमिक स्तर (7-11 वर्ष) के विद्यार्थियों के लिए निबंध, कविता, पोस्टर निर्माण और एकल गायन जोड़े गए हैं।
– माध्यमिक स्तर (12-18 वर्ष) के विद्यार्थियों के लिए समूह चर्चा, योग शिविर, डिजिटल प्रेजेंटेशन, मूक अभिनय और रचनात्मक लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित होंगी।
संस्कारों के साथ राष्ट्रीय एकता का संदेश
चित्रकला और पोस्टर प्रतियोगिता में भगवान ऋषभदेव के जीवन प्रसंगों के साथ राष्ट्रीय एकता, पर्यावरण संरक्षण और उनके प्रतीक चिन्ह बैल व स्वास्तिक जैसे विषय शामिल किए गए हैं। इससे विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी विकास होगा।
तैयारियां पूरी, टीमों का किया गठन
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान झालरापाटन के उपप्रधानाचार्य और कार्यक्रम संयोजक सुरेंद्र कुमार जैन ने बताया कि पखवाड़े के सफल आयोजन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिले में टीमों का गठन कर विद्यालयों से संपर्क किया जा रहा है। समाज के लोगों ने इस पहल के लिए राज्य सरकार का आभार जताया है।
कौन थे भगवान ऋषभदेव
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव को आदिनाथ के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें मानव सभ्यता को व्यवस्थित जीवन जीने की दिशा देने वाला प्रथम शिक्षक माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने ही लोगों को कृषि, व्यापार, लेखन और सामाजिक व्यवस्था की शिक्षा दी। त्याग, तप और ज्ञान के प्रतीक ऋषभदेव ने अहिंसा, सत्य और आत्मसंयम का संदेश दिया, जो आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।


