जयपुर। राजस्थान में डिजिटल डेटा की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की गई है। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (14C) के अवलोकनों के बाद यह सामने आया है कि साइबर अपराधी अब विशेष रूप से उन संस्थानों को निशाना बना रहे हैं जो नेटवर्क अटैच्ड स्टोरेज (एनएएस) उपकरणों का उपयोग करते हैं। इनमें चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्में, कंसल्टिंग एजेंसियां, अस्पताल, आईटी एवं मीडिया क्षेत्र से जुड़े पेशेवर और शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं।उपमहानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि साइबर हमलावरों का तरीका बेहद शातिराना है। ये अपराधी इंटरनेट पर असुरक्षित या ओपन एनएएस सिस्टम की पहचान करते हैं। कमजोर पासवर्ड या पुराने सॉफ्टवेयर का फायदा उठाकर वे सिस्टम में अनधिकृत प्रवेश करते हैं और संस्थान के महत्वपूर्ण डेटा को कॉपी या एन्क्रिप्ट (लॉक) कर देते हैं। इसके बाद संवेदनशील जानकारी को सार्वजनिक करने की धमकी देकर भारी फिरौती की मांग की जाती है, जिससे संस्थान अपने ही डेटा तक पहुँचने में असमर्थ हो जाता है।
इन क्षेत्रों पर मंडरा रहा है सबसे अधिक जोखिम
एडवाइजरी के अनुसार चार्टर्ड अकाउंटेंट और आईटी क्षेत्र से जुड़े पेशेवर इस समय हमलावरों के प्रमुख लक्ष्य हैं क्योंकि उनके पास क्लाइंट्स का बेहद गोपनीय और वित्तीय डेटा होता है। इसके अलावा मीडिया हाउस और बड़े अस्पतालों के डेटा स्टोरेज सिस्टम पर भी रैनसमवेयर हमलों की घटनाएं हुई हैं।
कैसे बचाएं अपना कीमती डेटा
साइबर विशेषज्ञों ने संस्थानों को निम्नलिखित सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी है: अपने एनएएस सिस्टम की इंटरनेट पर सीधी पहुंच को सीमित रखें। सिस्टम में मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन और बेहद मजबूत पासवर्ड का प्रयोग करें। सॉफ्टवेयर को समय-समय पर अपडेट करें और सभी सुरक्षा पैच लागू करें। समय-समय पर सुरक्षित बैकअप तैयार करें, बैकअप को ऑफलाइन या सुरक्षित स्थान पर रखें। आपात स्थिति में डेटा रिकवरी की व्यवस्था रखें। सिस्टम की लगातार मॉनिटरिंग करें। संदिग्ध गतिविधि दिखते ही तुरंत कार्रवाई करें।प्रभावित सिस्टम को तुरंत नेटवर्क से अलग करें।
आवश्यकता पड़ने पर साइबर विशेषज्ञों की मदद लें
इस प्रकार की घटना हो जाती है तो इसकी सूचना तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन / साइबर पुलिस स्टेशन/साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in साइबर हेल्प लाईन नम्बर 1930 या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930/9257510100 पर देवें।






