राजगढ़ रेल लाइन पर संचालन की अनुमति मिली, लेकिन खामियां भी, इसलिए 75 किमी/घंटा तक ही रहेगी रफ्तार

झालावाड़ . करीब 26 साल के इंतजार के बाद तैयार हुई खिलचीपुर-राजगढ़ रेल लाइन पर ट्रेन संचालन के लिए रेलवे संरक्षा आयुक्त ने अंतरिम अनुमति ताे दे दी है, लेकिन निरीक्षण रिपोर्ट में कई खामियां भी बताई गई है। एेसे में स्पष्ट शर्तों के साथ दी गई अनुमति के तहत फिलहाल ट्रेनाें का संचालन अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ही हाे सकेगा। 21 मार्च 2026 को जारी इस अंतिरम प्राधिकार-पत्र में रेलवे संरक्षा आयुक्त गुरुप्रकाश ने स्पष्ट किया है कि ये अनुमति पूरी तरह अंतरिम है और कई तकनीकी सुधार पूरे होने के बाद ही नियमित संचालन संभव होगा।
निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ी समस्या ट्रैक की गुणवत्ता और अलाइनमेंट में सामने आई। कई स्थानों पर ट्रैक में क्षैतिज व ऊर्ध्वाधर असमानता पाई गई, जिससे तेज गति से संचालन संभव नहीं है। कर्व वाले हिस्सों में बैलेस्ट की कमी और प्रोफाइलिंग में गड़बड़ी दर्ज की गई, जिससे सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। कुछ स्थानों पर ट्रैक के जोड़, स्लीपर स्पेसिंग और टर्नआउट भी मानकों के अनुसार नहीं पाए गए। इसके चलते निरीक्षण टीम ने स्पष्ट कहा कि जब तक ये कमियां दूर नहीं होतीं, तब तक गति सीमा बढ़ाना जोखिम भरा होगा।

प्लेटफॉर्म और स्टेशन व्यवस्थाएं भी अधूरी

राजगढ़ स्टेशन पर प्लेटफॉर्म की ऊंचाई में बड़ा अंतर पाया गया। कहीं ऊंचाई 940 मिमी तक है, तो कहीं ये घटकर 680 मिमी तक पहुंच गई है। इसके अलावा प्लेटफॉर्म से ट्रैक की दूरी में भी असमानता दर्ज की गई, जो यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मुद्दा है। यात्री सुविधाओं और स्टेशन से जुड़े कुछ काम भी अभी अधूरे हैं, जिन्हें पूरा करना जरूरी बताया गया है।


पुल, एम्बैंकमेंट व अन्य कार्यों पर भी की टिप्पणियां

निरीक्षण के दौरान पुलों और एम्बैंकमेंट की स्थिति सामान्य रूप से ठीक बताई गई, लेकिन कुछ स्थानों पर गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं और रखरखाव की चुनौतियां चिह्नित की गईं। एक पुल पर संरचना जरूरत से अधिक पाई गई, जिस पर तकनीकी समीक्षा की जरूरत बताई गई है। इसके अलावा कुछ स्थानों पर मिट्टी कार्य, कंक्रीटिंग और सुरक्षा व्यवस्थाओं में भी सुधार की आवश्यकता जताई गई है।
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कोई जल्दबाजी नहीं, थोड़ी-बहुत कमी बाद में पूरा करते हैं…

पहले से तय तारीख पर ही निरीक्षण कराया गया, कोई जल्दबाजी नहीं की है। पहले भी जो निरीक्षण हुए हैं, उनमें भी प्रोविजनल अथॉराइजेशन ऐसे ही मिलता है, ये नॉर्मल प्रोसेस रहती है। हमने 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से निरीक्षण कराया है। वैसे प्रोविजनल 75 किमी प्रति घंटा की स्पीड की ही अनुमति मिलती है। थोड़ी-बहुत कमी रहती है, बाद में उसे पूरा करते हैं। अब फिर से टीम निरीक्षण करेंगी, कमियां ठीक करने के बाद स्पीड बढ़ाई जा सकेगी।
– गौरव मिश्रा, डिप्टी चीफ इंजीनियर, (कंस्ट्रक्शन) रेलवे, काेटा

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