जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने लोक सेवकों को दुर्भावनापूर्ण और बदले की भावना से दर्ज कराए जाने वाले मुकदमों से बचाने के लिए ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ के तहत एक अहम कानूनी व्यवस्था दी है। जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने श्रीगंगानगर की विशेष अदालत के उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया, जिसमें चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज के निर्देश दिए गए थे।कोर्ट ने साफ कहा कि नए कानून BNSS की धारा 223 अब हर सरकारी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई से पहले दो जरूरी शर्तें लागू करती है:
बिना इन दोनों के कोई मजिस्ट्रेट सीधे FIR का आदेश नहीं दे सकता।
अधिकारी को अपना पक्ष रखने का असली मौका देना
उसके वरिष्ठ अधिकारी से तथ्यात्मक रिपोर्ट लेना
