भारत में अब हुआ, लेकिन महिला आरक्षण बिल दुनियां के 64 से अधिक देशों में पहले से ही लागू है

विशेष रिपोर्ट: दुनिया भर में महिला आरक्षण – एक नजर अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर

न्यूज ओरियम, दिल्ली। हाल ही में भारत में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल 2023) के पारित होने के बाद, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पर वैश्विक चर्चा तेज हो गई है, लेकिन भारत में जहां महिला आरक्षण बिल अब जाकर लागू हुआ वहीं दुनियां भर के 64 से अधिक देशों ने अपनी संसद में महिलाओं के लिए किसी न किसी प्रकार के कोटा या आरक्षण की व्यवस्था की है।आइए जानते हैं किन देशों ने इस दिशा में मिसाल कायम की है और इसके क्या फायदे मिल रहे हैं।

प्रमुख देशों में आरक्षण की स्थिति

दुनिया भर में आरक्षण को मुख्य रूप से दो तरीकों से लागू किया गया है: संवैधानिक/कानूनी अनिवार्य कोटा और राजनीतिक दलों द्वारा स्वैच्छिक कोटा।

देशआरक्षण का स्वरूपवर्तमान स्थिति / प्रभाव
रवांडा (Rwanda)संवैधानिक (30% अनिवार्य)यहाँ महिलाओं की भागीदारी दुनिया में सबसे अधिक (लगभग 61%) है।
नेपाल (Nepal)संवैधानिक (33%)संसद में महिलाओं के लिए एक तिहाई भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
बांग्लादेश (Bangladesh)कानूनी (50 सीटें)350 सदस्यीय संसद में 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
अर्जेंटीना (Argentina)कानूनी कोटायह देश लैटिन अमेरिका में विधायी कोटा लागू करने वाले शुरुआती देशों में से है।
स्वीडन (Sweden)स्वैच्छिक दलीय कोटायहाँ कोई कानून नहीं है, पर राजनीतिक दल खुद 46% से अधिक महिलाओं को टिकट देते हैं।

नोट: फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका, नॉर्वे और मैक्सिको जैसे देशों में भी विभिन्न कानूनी और स्वैच्छिक तंत्रों के माध्यम से महिलाओं की उच्च भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

महिला आरक्षण के प्रमुख लाभ: क्या कहता है वैश्विक अनुभव?

विभिन्न देशों और भारत में स्थानीय निकायों (पंचायतों) के अनुभवों के आधार पर महिला आरक्षण के निम्नलिखित फायदे सामने आए हैं:

  • निर्णय प्रक्रिया में संवेदनशीलता: महिला प्रतिनिधियों के आने से नीति निर्धारण में पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और प्राथमिक शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों को अधिक प्राथमिकता मिलती है।
  • विविध दृष्टिकोण: जब नीति बनाने वाली मेज पर विविधता होती है, तो समाज के हर वर्ग की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
  • पितृसत्तात्मक ढांचे में बदलाव: यह राजनीति में पुरुषों के सदियों पुराने एकाधिकार को चुनौती देता है और सामाजिक न्याय का मार्ग प्रशस्त करता है।
  • रोल मॉडल का उदय: नेतृत्व के पदों पर महिलाओं को देखकर युवा लड़कियां प्रेरित होती हैं, जिससे भविष्य में ‘जेंडर गैप’ कम होता है।
  • शासन में सुधार: कई अध्ययनों से संकेत मिलता है कि महिला नेतृत्व वाले क्षेत्रों में भ्रष्टाचार में कमी और सामुदायिक कल्याण के कार्यों में तेजी देखी गई है।

भारत के लिए आगे की राह

भारत में यह 33% आरक्षण प्रक्रिया परिसीमन (Delimitation) के बाद लागू होने की संभावना है, जो संभवतः 2029 के आम चुनावों के आसपास प्रभावी होगी। यह कदम वैश्विक मंच पर भारत की लैंगिक समानता रैंकिंग (Gender Equality Ranking) को सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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